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    चौधरी के निधन पर क्षेत्र में शोक की लहर

    #धोरीमन्ना | चमन पटेल | #CapsNews


    राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सदस्य एवं धोरीमन्ना पंचायत समिति के पूर्व प्रधान गंगाराम चौधरी का कल शुक्रवार दोपहर मे निधन हो गया। चौधरी के निधन की खबर से गुडामालानी विधानसभा क्षेत्र एवं धोरीमन्ना पंचायत समिति क्षेत्र में शोक की लहर छा गई।
    गंगाराम चौधरी 1988 मे कांग्रेस पार्टी के टिकट पर धोरीमन्ना पंचायत समिति के प्रधान निर्वाचित हुए थे। वे 5 साल 1993 तक धोरीमन्ना पंचायत समिति के प्रधान रहे। इससे पूर्व चौधरी भेडाणा ग्राम पंचायत के चार बार सरपंच रहे।  चौधरी कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में गिने जाते थे एवं पूर्व राजस्व मंत्री हेमाराम चौधरी के करीबी नेताओं में से थे।

    पूर्व प्रधान गंगाराम चौधरी के निधन पर पूर्व राजस्व मंत्री हेमाराम चौधरी, पूर्व जिला प्रमुख राणा भवानीसिंह, धोरीमन्ना पंचायत समिति के प्रधान ताजाराम चौधरी, एडवोकेट बलवंतसिंह चौधरी, पूर्व प्रधान मगाराम चौधरी, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष दिनेश कुलदीप, हनुमानराम गोदारा, गुडामालानी ब्लॉक अध्यक्ष पताराम चौधरी, कुंवर सुरेंद्रसिंह, गुडामालानी सेवा दल संगठन मंत्री कांतिलाल सोनी, पीसीसी सदस्य भंवर विश्वनाथसिंह, किसान नेता नाथाराम सारण, पूर्व सरपंच खुमाराम रामजी का गोल, ठेकेदार खेमाराम बेनिवाल, एडवोकेट बिशन सिंह चौधरी, रामलाल चौधरी, आईटी सेल संयोजक डीआर गोयल, समाजसेवी बाबूलाल सियाग, भोमाराम सियोल आदि कांग्रेस नेताओं ने पूर्व प्रधान चौधरी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया एवं कांग्रेस पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

    पढ़िए IIT-JEE के टॉपर की कहानी जो बन गया समाज की शान

    साल 2002 जून की गर्मी से उबलता राजस्थान। कोटा शहर में भी बहुत उथल-पुथल थी, उथल पुथल, इसलिए क्योंकि IIT का रिजल्ट घोषित होने था। कोटा जो मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए मशहूर एजुकेशन हब बन चुका था इस बार भी अपने यंहा से ही टॉपर की इंतजार कर रहा था ।
            दोपहर की गर्मी में बंसल क्लासेज ( IIT कोचिंग के लिए जाना पहचान नाम ) में सभी बेसब्री से IIT-JEE 2002 के परिणाम का इंतजार कर रहे थे । सभी छात्र एवं शिक्षक टकटकी लगाकर घड़ी की तरफ देख रहे थे । प्रार्थनाओं और ईश्वर को याद करने का दौर शुरू हो चुका था ।

    शाम के 5 बजते ही परिणाम घोषित हुआ और बंसल क्लासेज ने एक बार फिर सफलता के नए आयाम स्थापित किये और लगभग 2000 के आसपास विद्यार्थी परीक्षा पास कर चुके थे । बंसल क्लासेज को पूरी उम्मीद थी कि इस बार भी टॉपर उनके यही से निकलेगा लेकिन टॉपर का नाम देख बंसल क्लासेस के मैनेजमेंट और स्टूडेंट्स में निराशा छा गयी । IIT-JEE 2002 की इस बार की सूची में नम्बर 1 यानी टॉपर की जगह पर नाम था डूंगरा राम चौधरी का । डूंगरारामजी चौधरी निवासी जालोर, राजस्थान ।

    उस समय टेक्नोलॉजी और तकनीक का इतना प्रभाव नहीं था कि डेटाबेस से एक सर्च से सारा रिकॉर्ड खंगाला जा सके । बंसल क्लासेज में अपनी एक व्यवस्था है । सबसे इंटेलीजेंट स्टूडेंट्स को वे अपने प्रीमियम बैच में रखते है, जिसमे विशेषज्ञ उन स्टूडेंट्स पर विशेष मेहनत करते है ।यह प्रीमियम बैच ही मेरिट लिस्ट में ऊपर के स्थान पर कब्जा करते है । बाकी सामान्य और ग्रामीण परिवेश से आनेवालों के लिए जनरल बैच बनते है जिन पर संस्थान ज्यादा ध्यान नही देता । वे सिर्फ धन उपलब्ध करवाने वाले होते है, उनसे विशेष उम्मीद भी नही होती ।  तो बंसल क्लासेस के मैनेजमेंट ने उस दिन अपने सभी टॉपर बैच में पड़ताल की लेकिन यह नाम नहीं मिला तो उन्होंने मान लिया कि इस बार टॉपर कोई और जगह से बना । थोड़ी देर बाद पता चला कि चोटी के अन्य कोचिंग संस्थानों में भी इस टॉपर का नाम नही है ।चारो तरफ अफवाहों का दौर गर्म हो गया क्योंकि अगर टॉपर बंसल क्लासेज या करियर पॉइंट और रेजोनेंस से नहीं बना तो फिर कहाँ से बना ?

    रिजल्ट के 2 घंटे बाद शाम को 7 बजे के आसपास एक 18 वर्ष का बेहद सामान्य से दिखने वाला दुबला पतला चश्मा लगाया विद्यार्थी बंसल क्लासेज के डायरेक्टर रूम में जाता है और पांव छूकर कहता है कि "सर मेने IIT टॉप कर लिया है ।"

    उस वक्त तक उस विद्यार्थी को उसके बैच के कुछ साथियों के अलावा कोई नहीं जानता था । डाइरेक्टर साहब अवाक रह जाते है । पूरा मैनेजमेंट और स्टाफ हैरान हो जाता है कि जिसे हम जानते तक नही , उस सामान्य स्टूडेंट्स की भीड़ में से यह कौन टॉपर आ गया?

    तुरंत पेपर्स खंगाले जाते है । पता चलता है कि यह चौधरी साहब पश्चिमी राजास्थान में मारवाड़ के सुदूर जिले जालोर से बंसल क्लासेस में पढ़ने आये थे ।अंग्रेजी में कमजोर होने के कारण बंसल क्लासेस की तकनीकी कमेटी उनकी प्रतिभा को पहचान नही पाई और उन्हें प्रीमियम बैच में स्थान नही मिल पाया । लेकिन अब रिजल्ट की शाम वो ग्रामीण हिंदी माध्यम का लड़का एक स्टार सेलिब्रिटी बन चुका था। अगले दिन हर न्यूज़ पेपर में उसकी फोटो छपी और उसके नाम व फोटो के बैनर/फलेक्सेस पूरे कोटा शहर में छा चुके थे । बंसल क्लासेज ने एक बार फिर IIT-JEE की टॉप रैंक कब्जे में लेकर अपनी उपयोगिता साबित कर दी थी । डूंगरा राम जी चौधरी अब बंसल क्लासेस की शान बन चुका था ।


    अब डूंगराराम की कहानी हर कोई जानना चाह रहा था। राजस्थान के जालोर जिले के एक गांव से आने वाले डूंगरा राम चौधरी ने अपनी मेहनत और लगन से देश के प्रतिष्ठित एग्जाम में टॉप किया। जालोर के किसान परिवार से आने वाले डूंगराराम जी ने शुरुआती पढाई अपने गांव से करने के बाद जालोर शहर की तरफ आगे की पढाई के लिए रुख किया । 12 वी पास करने के बाद IIT-JEE की तैयारी के लिए 1 साल का गैप लिया और पहुंच गए कोटा अपनी किस्मत आजमाने । एक सामान्य विद्यार्थी के रूप में साल भर पढाई करने वाले डूंगरा राम ने अपनी प्रतिभा का लोहा टॉपर बनकर मनवा लिया ।

    IIT-JEE में टॉप करने के बाद डूंगरारामजी ने IIT कानपुर में कंप्यूटर इंजीनियरिंग में दाखिला लिया और वहाँ पर भी अपने बैच के टॉपर रहे । हिंदी माध्यम से पढ़कर IIT टॉप करके IIT कानपूर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिला लेना डूंगराराम जी के लिए किसी सपने के सच होने जैसा साबित हुआ ।

    इंजीनियरिंग के बाद डूंगराराम जी ने AirTight Netorks नाम की कंपनी में अपना करियर शुरू किया और लगभग 2 वर्ष वहां काम करने के बाद Oracle में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में पिछले 11 वर्ष से काम कर रहे है । Oracle में वो आधुनिक तकनीक जैसे क्लाउड कंप्यूटिंग और क्लस्टरिंग जैसे प्लेटफार्म पर काम कर रहे है । वो अब तक 2 रिसर्च पेपर एवं एक पेटेंट पब्लिश कर चुके है और वर्तमान में कैलिफोर्निया में अपने परिवार के साथ रह रहे है ।

    जालोर के छोटे से गांव से कैलिफोर्निया तक का सफर डूंगरा राम जी के लिए बहुत ही रोमांचक और संघर्षपूर्ण रहा है लेकिन डूंगराराम जी ने अपनी लगन और मेहनत से हर बड़े लक्ष्य और मुसीबत को अपने सामने बौना साबित कर दिया है ।

    आज 15 साल बाद बंसल क्लासेस भी इस अनुपम उपलब्धि पर अपने यंहा स्कालरशिप प्रोग्राम उनके नाम पर चलाती है । फोटो में डूंगराराम जी चौधरी अपने पिता के साथ । ध्यान रखिये प्रतिभा को कान्वेंट, अंग्रेजी या बड़े शहर की दरकार नही होती । अपने हुनर पर भरोसा रखें । सफलता अवश्य मिलेगी । (लेखक- सुधांशु)

    अगर आपको उस प्रतिभा पर गर्व हैं तो शेयर करें....

    ४ साल की तन्वी चौधरी के अपरणकर्ता को रानीवाड़ा से पकड़ा

    बनासकांठा जिले के पालनपुर तहसील के भूतेडी गांव की प्राथमिक शला में अध्ययन कर रही एक 4 वर्षीय बालिका का अपहरण करने का वाकया घटित हुआ है। हालांकि, बनासकांठा पुलिस की सजगता एवं रानीवाड़ा पुलिस की पैन्नी नजर से मंगलवार रात्रि 9 बजे आरोपी को बालिका समेत सकुशल हालात में रानीवाड़ा कस्बे के भीनमाल रेल्वे क्रासिंग के पास स्थित एक होटल के पास से दस्तियाब कर लिया गया है। बालिका के सकुशल व स्वस्थ हालत में मिलने से परिजनों ने राहत की सांस ली है।

    जानकारी के मुताबिक, पालनपुर तहसील भूतेडी गांव में बादरपूरा कृषि फार्म के मालिक मनुभाई पुत्र पृथ्वीभाई आंजणा चैधरी की 4 साल की बालिका तन्वी गांव की प्रेरणा प्राथमिक पाठशाला में पहली कक्षा में अध्ययन कर रही थी। मनूभाई के खेत पर गत दो सालों से खेती का कार्य कर रहे सरदार उर्फ मुकेश निवासी सेंबलपाणी तहसील दांता को मनूभाई ने बाईक देकर बालिका को स्कूल से घर लाने के लिए भेजा था पर शाम तक घर नही आने पर परिजनों के हाथ पैर फूल गए। आस पास में खोजबीन की गई। मुकेश का मोबाईल फोन भी बंद आने व बालिका स्कूल में नही मिलने पर पालनपुर पुलिस में मामला दर्ज कराया गया।
    पालनपुर पुलिस ने नवीन तकनीक का इस्तेमाल कर सरदार की लोकेशन को रानीवाड़ा में खोजने में सफलता हासिल कर ली। बनासकांठा पुलिस की कई गाडिया रानीवाड़ा पहुंची। रानीवाड़ा पुलिस के जवानों ने थानाधिकारी चंपालाल बारड़ के निर्देशन में कस्बे की गली नुक्कड पर सादी वर्दी में जवान खडे कर दिए। पुलिस को रानीवाड़ा यूथ टीम ने मदद कर रात्रि 9 बजे आरोपी को भीनमाल रेलवे क्रासिंग के पास स्थित एक होटल के पास से बरामद करने पर सफलता मिल ही गई।
    बालिका तन्वी के पिता मनूभाई ने बताया कि आरोपी दो सालों से खेती के कार्य में सहयोगी रहा था। उसपर पूरे परिवार का विश्वास था परन्तु अपहरण करने के पीछे क्या कारण रहे होंगे यह जांच का विषय है। उन्होंने पालनपुर व रानीवाड़ा पुलिस टीम का आभार जताते हुए सकुशल हालत में बालिका के मिलने पर राहत की सांस ली है। पूलिस ने रानीवाड़ा कस्बे से आरोपी के सहयोगी मनोज सहित कुछ ओर लोगों को हिरासत में लिया है। सहयोगी उत्तरप्रदेश के निवासी है और बरसों से रानीवाड़ा क्षेत्र में रंगरोगन का काम करते है।

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